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दमदार शायरी इन हिंदी

Aug 14, 2022

हमारी तो चाल भी शेरो जैसी है
तेरी शक्ल तो भेड़ो जैसी है
तुम क्या हमारी नकल करोगे
हमारी नकल भी कोहेनूर के ढेरो जैसी है

चंद्रमा की तरह चमकते है हम रात के समय
सूरज की रोशनी भी कम लगती है हमारी चमक के आगे प्रभात के समय

हमारी औकात की बात मत करना जनाब क्योकि
शेरो की कोई औकात नहीं बस बात होती है

हमारे दुश्मनों को सलामत रखना ऐ खुदा
क्योकि वो तो हमारी ललकार से ही मर जाते है

बंदूक की गोली को क्या पता जिसके सीने पर लगेगी वो तो खुद ही मौत है

असंभव को संभव करने में काम हमारा लिया जाता है
दुश्मनों की महफिलों में नाम हमारा लिया जाता है

जो हमे खरीदने आये थे वो खुद बिक गये
उनको क्या पता कोहेनूर की कोई कीमत नहीं होती

मेरे चेहरे की मासूमियत देखकर हल्के के मत लेना मुझको
इस मासूमियत ने पता नहीं कितने गुंडे सुधार दिये है

करेले की तरह कड़वा जरूर हूँ लेकिन सेहत सुधार देता हूँ
मीठा बनकर किसी को शुगर का मरीज नहीं बनाता

इश्क से उतने ही दूर ही हम
जितना की यमराज से मौत दूर रहती है

लौटकर मुझको गले लगाने की मत सोचना
क्योकि लौटी हुयी चीज को तो हम पैरो में रखना भी पसंद नहीं करते

हमारे खून में इतनी गर्मी है जनाब
तुझको तो क्या सूरज को भी पिघला देंगे

बेटा फर्क सिर्फ इतना है
जहाँ तेरे संपर्क है वहाँ
हमारे संबंध है

हम भी नवाब है  लोगों  की अकड़ धूएँ की तरह उड़ाकर औकात सिगरेट की तरह छोटी कर देते है ।

हम में अकड़ है गुरूर है फिर भी रेहमत देखो रब की… हमे चाहने के लिए सब मजबूर है

राहें‬ बदले या बदले वक्त‬ हम तो अपनी मँजिल पायेंगे‬, जो समझते है खुद को ‪‎बादशाह‬ एक दिन उसे अपने ‪दरबार‬ में ‪जरूर नचायेंगे‬

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