एट्टीट्यूड शायरी हिंदी

September 1, 2022
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नमक की तरह हो गयी है
ज़िंदगी लोग स्वाद  अनुसार इस्तेमाल कर लेते हैं !!!

नजर  झुका के बात कर #पगली जितने तेरे पास कपड़े
नहीं होंगे, उतने तो मैं रोज के #लफड़े ⚔️ करता हूँ…

हम  #मरेंगे भी तो उस अंदाज़ से..
जिस अंदाज़ में लोग जीने को भी तरसते हैं…

आज तक ऐसी कोई रानी नहीं बनी,
जो इस बदमाश को अपना गुलाम बना सके !

रहते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस खाक नहीं होते.

सर झुकाने की आदत नहीं आंसू बहाने की आदत नहीं,
हम बिछड़ गए तो रोओगे,
क्योंकि हमारी लौट के आने की आदत नहीं.

जिसको जो कहना है कहने दो, अपना क्या जाता है,
ये वक्त वक्त की बात है, और वक्त सबका आता है.

हम भी नवाब है लोगों की अकड़ धूएँ की तरह उड़ाकर,
औकात सिगरेट की तरह छोटी कर देते है.

हम बाजीराव नहीं जो मस्तानी के लिए दोस्ती छोड़ दे,
अरे पगली हम तो दोस्ती के लिए हज़ारो मस्तानी छोड़ देंगे !

मेरे ठोकरें खाने से भी कुछ लोगों को जलन है,
कहतें हैं यह शख्स तजुर्बे में आगे निकल गया !

चाँद हो या सूरज, चमकते सब हैं अपना वक़्त आने पर

 

तक़दिर हाथों में है, लकीरों में नहीं…

 

अंदाजे से ना नापिये किसी की हस्ती को..ठहरे हुए दरिया अक्सर गहरे होते हैं

प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुंगा तो जिक्र भी नही करुंगा!!


जो न देते थे जवाब उनके सलाम आने लगे, वक़्त बदला तो मेरे नीम पे आम आने लगे..

उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से जिंदगी, जहाँ सारा शहर अपना था और तुम अजनबी…

नफरत है गुरुर नहीं, दुबारा इश्क़ मंजूर नहीं..

मुझे मत मिलाओ किसी और में, मुझसा कोई नही है इस दौर में।

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Hindi Shayari · Shayari

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